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[ रूपरेखा- एक बड़ा जमदार बहुत से नौकर-चाकर खेती की आमदनी का न बढ़ना- मित्र की सलाह- 'सुबह खेत की सैर करो'- कुछ नौकर गायब, कुछ चीजें गायब- आँखें खुलना खुद काम में लग जाना- रोज देखभाल-सभी में उत्साह- आमदनी बढ़ना सीख]
अपना काम खुद करो अथवा श्रम से संपत्ति
कनकपुर में एक बड़ा जमींदार रहता था। उसके पास बहुत जमीन, जायदाद और कई नौकर-चाकर थे। उसके अनेक खेत थे और उनमें कई नौकर-चाकर खेती के काम में लगे हुए थे, फिर भी उसमें सदा घाटा रहता था।
एक दिन जमींदार का एक मित्र उसके घर आया भोजन के बाद दोनों मित्र गपशप लगाते हुए बैठे थे। जमींदार के चिंतित मुख को देखकर मित्र ने उसका कारण पूछा। जमींदीर ने सारा हाल कह सुनाया। तब उस मित्र ने जमदार से कहा, "हररोज सुबह खेत को सैर करो। तुम्हारी आमदनी अवश्य बढ़ जाएगी। "
जमींदार की समझ में यह नहीं आया कि सैर करने से आमदनी कैसे बढ़ेगी ? फिर भी उसने मित्र की सलाह मान ली। दूसरे दिन सुबह खेत पर पहुँचा तो उसने देखा कि कुछ नौकर गायब हैं और कुछ बैठे-बैठे ताश खेल रहे हैं। खेती के कई औजार भी गायब थे। यह हाल देखकर सारी बात जमींदार की समझ में आ गई। उस दिन से वह रोज अपने खेतों पर जाने लगा और खुद भी नौकरों के साथ-साथ काम करने लगा।
अब सभी नौकर ठीक से काम करने लगे। कम समय में अधिक काम होने लगा। जमींदार की आमदनी धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

