Tuesday, 24 May 2022

विश्वास is best motivational story writing..

 लघुकथा: श्याम आठले  स्त्रियां सभ्य शब्दों में ही बात करती हैं। उन्हें • दूसरों के आहत होने का ख़्याल रहता है, लेकिन इसी बात पर किसी अपने को भरोसा भी हो, तो कितना सुकून मिलता है।

विश्वास 

 


     :अरे! चावला साहब, आप कल शाम कहां गए थे? मैं आपके घर गया था। मैंने आपकी मैडम से पूछा तो उन्होंने कहा- 'अभी तो घर पर नहीं है यूं ही हवाखोरी करने गए हैं। 'किसी ग़लत घर में पूछ लिया शायद आपने।" ््


"अरे नहीं", आपके ही यहां गया था। जवाहर कॉलोनी में वी कुंए के पास वाला घर आपका ही है न। मैंने आपकी नेमप्लेट भी देखी थी। आपको फोन करने वाला था पर फिर सोचा आपसे बाद में मिल लूंगा।'


"तोमर जी, आप मेरा पता तो सही बता रहे है पर क्या जो आप कह रहे हैं वो ही मेरी मिसेज ने कहा था कि मैं हवाखोरी करने गया हूं?"


'अरे नहीं सर, उन्होंने तो कहा था कि खुली हवा में टहलने बाए हैं।' 'वही में कहूं कि मेरी पत्नी इस तरह के शब्दों का उपयोग कर


ही नहीं सकती, क्योंकि इस तरह की शब्दावली उनकी नहीं है। मुझे अपनी पत्नी और उसकी सभ्य जबान पर पूरा भरोसा है।' "ओह. शायद आप बुरा मान गए। दरअसल मैंने अपने शब्दों में बात कह दी।"


देखिए तोमर जी, हवाखोरी वैसे तो अपने आप में कोई बुरा शब्द नहीं हैं पर किसी के कड़े शब्द बदल देना कोई बहुत अच्छी बात नहीं। कभी-कभी शब्द बदल देने से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। आपने ये पंक्तियां तो पढ़ी-सुनी होगी ही शब्द सम्भारे बोलिये, शब्द के हाथ न पांव।


एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव।


ध्यान रखें कि आप जो भी शब्द अपनी बात कहने के लिए इस्तेमाल करते हैं उससे ही आपकी छवि बनती बिगड़ती है।" तोमर जी ने गले में अटका थूक जल्दी से निगलते हुए कहा "जी. अब ध्यान रखूंगा।'


महिलाएं पुरुषों से अधिक बुद्धिमान होती हैं क्योंकि भले वो जानती कम हैं लेकिन समझती ज्यादा हैं। 


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