Saturday, 19 August 2023

"विकलांग सपना" Motivational Story

#MOTIVATIONAL STORY WRITING

                                                                         Title: "विकलांग सपना"

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में रामू नामक लड़के का जन्म हुआ। जब उसकी माँ उसे पहली बार देखी, तो उसके दिल में बड़े ख्याल आए। रामू बचपन से ही विकलांग था, उसकी दोनों टांगें नहीं थीं। परंतु, रामू के माता-पिता ने उसे एक नायिक बनाने का संकल्प लिया।

रामू की माता बड़े समय तक उसे घर पर पढ़ाती रही, उसके साथ होकर खुशियों और दुखों का सामना करती रही। रामू ने जीवन के हर कदम पर माता के साथ चलना सीखा। धीरे-धीरे, उसकी माता ने उसे अध्ययन में भी प्रेरित किया और उसके मन में उच्च शिक्षा का सपना जगाया।

रामू ने खुद को अध्ययन में समर्पित किया, और उसने बड़ी मेहनत की ताकि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके। उसके माता-पिता ने अपने खर्चों को कट करके उसकी पढ़ाई की दिशा में सहायता की।

धीरे-धीरे समय बीता और रामू ने अपने मेहनत और समर्पण से अच्छे अकादमिक परिणाम प्राप्त किए। उसने एक श्रेष्ठ विश्वविद्यालय में प्रवेश प्राप्त किया और अपने और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा किया।

रामू की कहानी उसके संघर्ष और संघर्ष को पार करने की उम्मीद का प्रतीक बन गई। उसकी माता-पिता की ममता, उसकी मेहनत, और उसकी निरंतरता ने उसे उस समस्या का सामना करने की क्षमता प्रदान की जिसने उसे उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सफलता दिलाई।

"विकलांग सपना" यह कहानी हमें यह सिखाती है कि समस्याओं का सामना करने में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि मेहनत, संघर्ष, और समर्पण के साथ समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए।

 

                          

Saturday, 12 August 2023

असली मंजिल की तरफ- short story #motivationalstory

                                    


                 Title: "असली मंजिल की तरफ"

किसी छोटे से गाँव में एक युवक आदित्य रहता था। उसका सपना था कि वह एक दिन बड़ा व्यापारी बनेगा, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। उसके पास न सिर्फ पैसे की कमी थी, बल्कि उसके पास पढ़ाई के लिए भी समय नहीं था।
अपने सपनों के पीछे दौड़ते दौड़ते, आदित्य ने एक छोटे से दुकान में काम करना शुरू किया। वह हर दिन सुबह उठकर दुकान पर चला जाता और रात तक काम करता रहता था। धीरे-धीरे, उसकी मेहनत और समर्पण उसकी दुकान को बढ़ावा देने लगे।
आदित्य की दुकान की सेवाओं की मांग बढ़ने लगी और उसकी आय भी बढ़ने लगी। लेकिन उसका सपना बड़ा व्यापारी बनने का अभी तक पूरा नहीं हो पाया था।
एक दिन, आदित्य की दुकान में एक बुद्धिमान व्यापारी आया और उसने आदित्य से पूछा, "तुम्हारा सपना क्या है और क्या तुम उसे पूरा करने के लिए कर रहे हो?"
आदित्य ने अपने सपने की कहानी सुनाई और उसके लिए की गई मेहनत का वर्णन किया। व्यापारी ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारी मेहनत और संघर्ष को देखकर मुझे यकीन है कि तुम अपने सपने को पूरा करोगे। मैं तुम्हारे साथ हूँ और तुम्हारा साथ देता हूँ।"
व्यापारी ने आदित्य की दुकान को अपने व्यापारिक संवाददाता के रूप में संयुक्त किया और आदित्य को व्यवसाय के कई नए तरीके सिखाए। आदित्य ने व्यापार में सफलता पाई और उसका सपना अंततः पूरा हुआ।
इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत, समर्पण, और उत्साह आवश्यक होते हैं। चाहे हमारी आर्थिक स्थितियाँ जैसी भी हो, हमारी मेहनत और संघर्ष हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद कर सकते हैं।



MOTIVATIONAL STORY OF THE BAMBOO AND THE THE OAK TREE

Title: The Bamboo and the Oak Tree


Once in a lush forest in India, there lived a bamboo tree and an oak tree side by side. The oak tree was strong and sturdy, while the bamboo tree seemed delicate in comparison. One day, a powerful storm swept through the forest, with winds that shook the trees to their roots.


The oak tree, known for its robustness, resisted the storm with all its might. It swayed and creaked under the pressure but managed to stand tall despite the adversity. The bamboo tree, on the other hand, bent and swayed gracefully with the wind, avoiding the brunt of its force.


After the storm subsided, the oak tree was still standing strong, albeit with some broken branches. The bamboo tree, however, stood tall and unharmed. The oak tree, amazed and somewhat envious, asked the bamboo tree how it managed to survive without a scratch.


The bamboo tree replied with a gentle smile, "Dear friend, I realized that the storm was beyond my control. Instead of resisting it, I chose to bend and sway with the wind. While you stood firm, your rigid resistance led to broken branches. I, on the other hand, allowed myself to be flexible and adaptable."


The oak tree pondered this lesson and realized the profound wisdom in the bamboo's approach. It understood that resilience doesn't always mean unyielding strength; sometimes, it means being open to change and adapting to circumstances.


Moral of the Story:

In the face of challenges, it's important to be strong like the oak tree, but also flexible like the bamboo. Life's storms and adversities are inevitable, and while strength is valuable, adaptability and flexibility can help us navigate through difficulties more gracefully. Embracing change and bending when needed doesn't make us weaker; it allows us to weather challenges and emerge stronger, just like the bamboo.


This story from India reminds us that resilience is not always about withstanding the storm with sheer force, but about finding the right balance between strength and adaptability. Just as the bamboo remains unbroken by bending, so can we overcome challenges by being open to change and learning from adversity.

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THANK YOU...






Tuesday, 24 May 2022

विश्वास is best motivational story writing..

 लघुकथा: श्याम आठले  स्त्रियां सभ्य शब्दों में ही बात करती हैं। उन्हें • दूसरों के आहत होने का ख़्याल रहता है, लेकिन इसी बात पर किसी अपने को भरोसा भी हो, तो कितना सुकून मिलता है।

विश्वास 

 


     :अरे! चावला साहब, आप कल शाम कहां गए थे? मैं आपके घर गया था। मैंने आपकी मैडम से पूछा तो उन्होंने कहा- 'अभी तो घर पर नहीं है यूं ही हवाखोरी करने गए हैं। 'किसी ग़लत घर में पूछ लिया शायद आपने।" ््


"अरे नहीं", आपके ही यहां गया था। जवाहर कॉलोनी में वी कुंए के पास वाला घर आपका ही है न। मैंने आपकी नेमप्लेट भी देखी थी। आपको फोन करने वाला था पर फिर सोचा आपसे बाद में मिल लूंगा।'


"तोमर जी, आप मेरा पता तो सही बता रहे है पर क्या जो आप कह रहे हैं वो ही मेरी मिसेज ने कहा था कि मैं हवाखोरी करने गया हूं?"


'अरे नहीं सर, उन्होंने तो कहा था कि खुली हवा में टहलने बाए हैं।' 'वही में कहूं कि मेरी पत्नी इस तरह के शब्दों का उपयोग कर


ही नहीं सकती, क्योंकि इस तरह की शब्दावली उनकी नहीं है। मुझे अपनी पत्नी और उसकी सभ्य जबान पर पूरा भरोसा है।' "ओह. शायद आप बुरा मान गए। दरअसल मैंने अपने शब्दों में बात कह दी।"


देखिए तोमर जी, हवाखोरी वैसे तो अपने आप में कोई बुरा शब्द नहीं हैं पर किसी के कड़े शब्द बदल देना कोई बहुत अच्छी बात नहीं। कभी-कभी शब्द बदल देने से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। आपने ये पंक्तियां तो पढ़ी-सुनी होगी ही शब्द सम्भारे बोलिये, शब्द के हाथ न पांव।


एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव।


ध्यान रखें कि आप जो भी शब्द अपनी बात कहने के लिए इस्तेमाल करते हैं उससे ही आपकी छवि बनती बिगड़ती है।" तोमर जी ने गले में अटका थूक जल्दी से निगलते हुए कहा "जी. अब ध्यान रखूंगा।'


महिलाएं पुरुषों से अधिक बुद्धिमान होती हैं क्योंकि भले वो जानती कम हैं लेकिन समझती ज्यादा हैं। 


Saturday, 23 April 2022

" हमारे जीवन के संघर्ष " this is the best motivated story.

 हमारे जीवन के संघर्ष


एक बार की बात है। एक छोटा सा परिवार था। वह परिवार बहुत ही दयनीय स्थिति से गुजर रहा था। परिवार हर समय संघर्ष कर रहा था। एक समस्या के हल होने पर दूसरी समस्या पीछे पड़ जाती थी।


इन संघर्षों से थककर परिवार के एक छोटे बच्चे ने अपने पिता से शिकायत की, “अब मैं जिंदगी के इन थपेड़ों से थक चुका हूं। हर रोज के संघर्ष से तंग आ चुका हूं। मुझे अपना भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है।”

हमारे जीवन के संघर्ष


उसका पिता एक पेशेवर रसोइया था। वो लड़के को रसोई घर में ले आया। उसने पानी से तीन घड़े भरे और तीनो को चूल्हे पर रख दिया।


जब तीनो बर्तन में पानी उबलने लगा, तो उसने एक बर्तन में आलू रखे, दूसरे बर्तन में अंडे और तीसरे बर्तन में कॉफी बीन्स। तीनो बर्तन को उबालने दिया।


बेटा बेसब्री से इंतजार कर रहा था, सोच रहा था कि उसके पापा क्या कर रहे है। 20 मिनट के बाद वह बर्नर बंद कर दिया।


उसने आलू को बर्तन से बाहर निकाला और एक कटोरे में रखा। उसने अंडों को बाहर निकाला और उन्हें एक कटोरे में रखा। फिर उसने कॉफी को बाहर निकाला और एक कप में रखा।


लड़के की ओर मुड़कर उसने पूछा, “बेटा, तुम क्या देख रहे हो?”


“आलू, अंडे और कॉफी,” उसने झट से जवाब दिया।


“करीब से देखो और आलू को छुओ।”


लड़के ने छुआ और कहा कि आलू नरम हो गए हैं।


फिर उसने लड़के को एक अंडा लेने और उसे तोड़ने के लिए कहा। खोल को तोड़ने के बाद, उसने कठोर उबले हुए अंडे को देखा।


अंत में, उसने लड़के को कॉफ़ी पीने के लिए कहा। इसकी मस्त सुगंध उसके चेहरे पर मुस्कान ले आई।


“पिताजी, इसका क्या मतलब है?” लड़के ने पूछा।


फिर पिता ने समझाया कि आलू, अंडे और कॉफी बीन्स इन तीनों को एक ही प्रतिकूलता यानी उबलते पानी का सामना करना पड़ा। और हर एक ने अलग तरह से प्रतिक्रिया दी। आलू मजबूत, कठोर था, लेकिन उबलते पानी में, यह नरम और कमजोर हो गया।


अंडा नाजुक था, जिसके अंदरूनी भाग की रक्षा एक पतला बाहरी आवरण कर रहा था। उस उबले पानी में अंडे के अंदर का हिस्सा सख्त हो गया।


इसी प्रकार, कॉफी बीन्स भी अलग थे। उबलते पानी के संपर्क में आने के बाद, इन्होंने पानी को बदल दिया और जबरदस्त कॉफी बनायी।


उसने अपने बेटे से पूछा, “कुछ तुम किस तरह के हो। जब प्रतिकूलता तुम्हारे दरवाजे पर दस्तक देती है, तो तुम कैसे प्रतिक्रिया देते हो? क्या तुम एक आलू हो या एक अंडा या फिर कॉफी बीन्स हो?”


कहानी :की शिक्षा

जीवन में हर रोज नई नई चीजें हमारे आस-पास होती हैं, लेकिन केवल एक चीज जो वास्तव में मायने रखती है, वह यह है कि आप इस पर प्रतिक्रिया कैसे करते हैं और इनसे क्या फायदा उठाते हैं। जीवन के सभी बदलाव को अपनाये और आने वाले उन सभी संघर्षों का सकारात्मकता के साथ सामना करे।


Daily Motivational Thoughts and Life Story.

Wednesday, 20 April 2022

"कठिनाइयों से ना घबराएं" Motivation Story Writing.

 कठिनाइयों से ना घबराएं


बहुत समय पहले की बात है एक शिल्पकार एक मूर्ति बनाने के लिए किसी जंगल में पत्थर ढूंढने के लिए गया। वहां उसे मूर्ति बनाने के लिए एक बहुत अच्छा पत्थर मिल गया।
     वो पत्थर लेके वापस घर आते वक्त रास्ते में से एक ओर पत्थर साथ उठा लाया। घर आकर उसने अच्छे वाले पत्थर को मूर्ति बनाने के लिए हथौड़ी और छेनी से उस पत्थर पर कारीगरी करने लगा।

     जब शिल्पकार की छेनी और हथौड़ी से पत्थर को चोट लगने लगी तो पत्थर ने दर्द से कराहते हुए शिल्पकार से बोला, “अरे भाई मेरे से यह दर्द सहा नहीं जाता, ऐसे तो मैं बिखर जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर की मूर्ति बना दो ना प्लीज़।”
उस पत्थर की बात सुनकर शिल्पकार को दया आ गई। उसने उस पत्थर को छोड़कर दूसरे पत्थर की गढ़ाई करनी शुरू कर दी। दूसरे पत्थर ने कुछ भी नहीं बोला। शिल्पकार ने थोड़े ही समय में एक प्यारी सी भगवान की मूर्ति बना दी।
     पास के गांव के लोग तैयार मूर्ति को लेने के लिए आए। मूर्ति को लेकर निकलने वाले थे लेकिन उन्हें ख्याल आया कि नारियल फोड़ने के लिए भी एक पत्थर की जरूरत होगी तो वहां पर रखा पहले वाला पत्थर भी उन्होंने अपने साथ ले लिया।
   मूर्ति को ले जाकर उन्होंने मंदिर में सजा दिया और पहले वाले पत्थर को भी सामने रख दिया।
मंदिर में जब भी कोई व्यक्ति दर्शन करने आते तो मूर्ति पर फूल माला चढ़ाते, दूध से नहलाते और उसकी पूजा करते। और सामने वाले पत्थर पर नारियल फोड़ते हैं।
अब पहले वाले पत्थर को हर रोज दर्द सहना पड़ता था।
उसने मूर्ति वाले पत्थर से कहा,”तुम्हारे तो मजे है। रोज फूल माला से सजते हों, रोज तुम्हारी पूजा होती हैं। मेरी तो साला किस्मत ही खराब हैं। रोज लोग नारियल फोड़ते हैं और मेरे को दर्द सहना पड़ता है।”
  पहले वाले पत्थर की बात सुनकर मूर्ति बने पत्थर ने कहा,”देख दोस्त अगर उस दिन तूने शिल्पकार के हाथ का दर्द सहा होता तो आज तुम्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता और तुम मेरी जगह पर होते। लेकिन तुमने तो थोड़े से समय के दर्द को ना सहकर आसान वाले रास्ते को चुना। अब तुम उसका नतीजा भुगत रहे हो।


शिक्षा: 
हमारे जीवन में भी कई कठिनाइयां आती है। बहुत सारा दर्द भी झेलना पड़ता है। लेकिन हमें इनसे डरकर पीछे नहीं हटना है, इनका डटकर मुकाबला करना है। यह विपरीत परिस्थितियां हमें और ज्यादा मजबूत बनाएगी। जिससे हम अपनी मंजिल के और ज्यादा करीब पहुंच जाएंगे।


Daily Motivational Thoughts and Life Quotes.

Thursday, 24 March 2022

"अपना काम खुद करो" अथवा "श्रम से संपत्ति" short story

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[ रूपरेखा- एक बड़ा जमदार बहुत से नौकर-चाकर खेती की आमदनी का न बढ़ना- मित्र की सलाह- 'सुबह खेत की सैर करो'- कुछ नौकर गायब, कुछ चीजें गायब- आँखें खुलना खुद काम में लग जाना- रोज देखभाल-सभी में उत्साह- आमदनी बढ़ना सीख]


अपना काम खुद करो अथवा श्रम से संपत्ति

"अपना काम खुद करो" अथवा "श्रम से संपत्ति"


कनकपुर में एक बड़ा जमींदार रहता था। उसके पास बहुत जमीन, जायदाद और कई नौकर-चाकर थे। उसके अनेक खेत थे और उनमें कई नौकर-चाकर खेती के काम में लगे हुए थे, फिर भी उसमें सदा घाटा रहता था।


एक दिन जमींदार का एक मित्र उसके घर आया भोजन के बाद दोनों मित्र गपशप लगाते हुए बैठे थे। जमींदार के चिंतित मुख को देखकर मित्र ने उसका कारण पूछा। जमींदीर ने सारा हाल कह सुनाया। तब उस मित्र ने जमदार से कहा, "हररोज सुबह खेत को सैर करो। तुम्हारी आमदनी अवश्य बढ़ जाएगी। "


जमींदार की समझ में यह नहीं आया कि सैर करने से आमदनी कैसे बढ़ेगी ? फिर भी उसने मित्र की सलाह मान ली। दूसरे दिन सुबह खेत पर पहुँचा तो उसने देखा कि कुछ नौकर गायब हैं और कुछ बैठे-बैठे ताश खेल रहे हैं। खेती के कई औजार भी गायब थे। यह हाल देखकर सारी बात जमींदार की समझ में आ गई। उस दिन से वह रोज अपने खेतों पर जाने लगा और खुद भी नौकरों के साथ-साथ काम करने लगा। 

अब सभी नौकर ठीक से काम करने लगे। कम समय में अधिक काम होने लगा। जमींदार की आमदनी धीरे-धीरे बढ़ने लगी।


सीख- स्वयं पसीना बहाए बिना लाभ की आशा रखना व्यर्थ है। अपना कारोबार नौकरों के भरोसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

Tuesday, 15 March 2022

"A Spider Shows The Way" short story.


    King Bruce of Scotland was defected in a battle. He was wounded and had to hide in a cave. He was quite depressed and ever lost the will to live. He was even thinking of giving up the fight altogether.
A Spider Shows The Way" short story.

    As King Bruce lay in the cave, he saw a spider degloving from the roof. It was trying to weave a web, but had fallen. slowly it climbed up and tried again, but fell again. This happened six times. Finally the spider manage to reach it web on the roof. King Bruce was amazed.If such a solve creature of a nature would try again and again and finally reach it web, why not he?, the king thought.

    The king determine to fight again and regain his lost kingdom.

"विकलांग सपना" Motivational Story

                                                                             Title: " विकलांग सपना " बहुत समय पहले की बात...