Saturday, 23 April 2022

" हमारे जीवन के संघर्ष " this is the best motivated story.

 हमारे जीवन के संघर्ष


एक बार की बात है। एक छोटा सा परिवार था। वह परिवार बहुत ही दयनीय स्थिति से गुजर रहा था। परिवार हर समय संघर्ष कर रहा था। एक समस्या के हल होने पर दूसरी समस्या पीछे पड़ जाती थी।


इन संघर्षों से थककर परिवार के एक छोटे बच्चे ने अपने पिता से शिकायत की, “अब मैं जिंदगी के इन थपेड़ों से थक चुका हूं। हर रोज के संघर्ष से तंग आ चुका हूं। मुझे अपना भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है।”

हमारे जीवन के संघर्ष


उसका पिता एक पेशेवर रसोइया था। वो लड़के को रसोई घर में ले आया। उसने पानी से तीन घड़े भरे और तीनो को चूल्हे पर रख दिया।


जब तीनो बर्तन में पानी उबलने लगा, तो उसने एक बर्तन में आलू रखे, दूसरे बर्तन में अंडे और तीसरे बर्तन में कॉफी बीन्स। तीनो बर्तन को उबालने दिया।


बेटा बेसब्री से इंतजार कर रहा था, सोच रहा था कि उसके पापा क्या कर रहे है। 20 मिनट के बाद वह बर्नर बंद कर दिया।


उसने आलू को बर्तन से बाहर निकाला और एक कटोरे में रखा। उसने अंडों को बाहर निकाला और उन्हें एक कटोरे में रखा। फिर उसने कॉफी को बाहर निकाला और एक कप में रखा।


लड़के की ओर मुड़कर उसने पूछा, “बेटा, तुम क्या देख रहे हो?”


“आलू, अंडे और कॉफी,” उसने झट से जवाब दिया।


“करीब से देखो और आलू को छुओ।”


लड़के ने छुआ और कहा कि आलू नरम हो गए हैं।


फिर उसने लड़के को एक अंडा लेने और उसे तोड़ने के लिए कहा। खोल को तोड़ने के बाद, उसने कठोर उबले हुए अंडे को देखा।


अंत में, उसने लड़के को कॉफ़ी पीने के लिए कहा। इसकी मस्त सुगंध उसके चेहरे पर मुस्कान ले आई।


“पिताजी, इसका क्या मतलब है?” लड़के ने पूछा।


फिर पिता ने समझाया कि आलू, अंडे और कॉफी बीन्स इन तीनों को एक ही प्रतिकूलता यानी उबलते पानी का सामना करना पड़ा। और हर एक ने अलग तरह से प्रतिक्रिया दी। आलू मजबूत, कठोर था, लेकिन उबलते पानी में, यह नरम और कमजोर हो गया।


अंडा नाजुक था, जिसके अंदरूनी भाग की रक्षा एक पतला बाहरी आवरण कर रहा था। उस उबले पानी में अंडे के अंदर का हिस्सा सख्त हो गया।


इसी प्रकार, कॉफी बीन्स भी अलग थे। उबलते पानी के संपर्क में आने के बाद, इन्होंने पानी को बदल दिया और जबरदस्त कॉफी बनायी।


उसने अपने बेटे से पूछा, “कुछ तुम किस तरह के हो। जब प्रतिकूलता तुम्हारे दरवाजे पर दस्तक देती है, तो तुम कैसे प्रतिक्रिया देते हो? क्या तुम एक आलू हो या एक अंडा या फिर कॉफी बीन्स हो?”


कहानी :की शिक्षा

जीवन में हर रोज नई नई चीजें हमारे आस-पास होती हैं, लेकिन केवल एक चीज जो वास्तव में मायने रखती है, वह यह है कि आप इस पर प्रतिक्रिया कैसे करते हैं और इनसे क्या फायदा उठाते हैं। जीवन के सभी बदलाव को अपनाये और आने वाले उन सभी संघर्षों का सकारात्मकता के साथ सामना करे।


Daily Motivational Thoughts and Life Story.

Wednesday, 20 April 2022

"कठिनाइयों से ना घबराएं" Motivation Story Writing.

 कठिनाइयों से ना घबराएं


बहुत समय पहले की बात है एक शिल्पकार एक मूर्ति बनाने के लिए किसी जंगल में पत्थर ढूंढने के लिए गया। वहां उसे मूर्ति बनाने के लिए एक बहुत अच्छा पत्थर मिल गया।
     वो पत्थर लेके वापस घर आते वक्त रास्ते में से एक ओर पत्थर साथ उठा लाया। घर आकर उसने अच्छे वाले पत्थर को मूर्ति बनाने के लिए हथौड़ी और छेनी से उस पत्थर पर कारीगरी करने लगा।

     जब शिल्पकार की छेनी और हथौड़ी से पत्थर को चोट लगने लगी तो पत्थर ने दर्द से कराहते हुए शिल्पकार से बोला, “अरे भाई मेरे से यह दर्द सहा नहीं जाता, ऐसे तो मैं बिखर जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर की मूर्ति बना दो ना प्लीज़।”
उस पत्थर की बात सुनकर शिल्पकार को दया आ गई। उसने उस पत्थर को छोड़कर दूसरे पत्थर की गढ़ाई करनी शुरू कर दी। दूसरे पत्थर ने कुछ भी नहीं बोला। शिल्पकार ने थोड़े ही समय में एक प्यारी सी भगवान की मूर्ति बना दी।
     पास के गांव के लोग तैयार मूर्ति को लेने के लिए आए। मूर्ति को लेकर निकलने वाले थे लेकिन उन्हें ख्याल आया कि नारियल फोड़ने के लिए भी एक पत्थर की जरूरत होगी तो वहां पर रखा पहले वाला पत्थर भी उन्होंने अपने साथ ले लिया।
   मूर्ति को ले जाकर उन्होंने मंदिर में सजा दिया और पहले वाले पत्थर को भी सामने रख दिया।
मंदिर में जब भी कोई व्यक्ति दर्शन करने आते तो मूर्ति पर फूल माला चढ़ाते, दूध से नहलाते और उसकी पूजा करते। और सामने वाले पत्थर पर नारियल फोड़ते हैं।
अब पहले वाले पत्थर को हर रोज दर्द सहना पड़ता था।
उसने मूर्ति वाले पत्थर से कहा,”तुम्हारे तो मजे है। रोज फूल माला से सजते हों, रोज तुम्हारी पूजा होती हैं। मेरी तो साला किस्मत ही खराब हैं। रोज लोग नारियल फोड़ते हैं और मेरे को दर्द सहना पड़ता है।”
  पहले वाले पत्थर की बात सुनकर मूर्ति बने पत्थर ने कहा,”देख दोस्त अगर उस दिन तूने शिल्पकार के हाथ का दर्द सहा होता तो आज तुम्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता और तुम मेरी जगह पर होते। लेकिन तुमने तो थोड़े से समय के दर्द को ना सहकर आसान वाले रास्ते को चुना। अब तुम उसका नतीजा भुगत रहे हो।


शिक्षा: 
हमारे जीवन में भी कई कठिनाइयां आती है। बहुत सारा दर्द भी झेलना पड़ता है। लेकिन हमें इनसे डरकर पीछे नहीं हटना है, इनका डटकर मुकाबला करना है। यह विपरीत परिस्थितियां हमें और ज्यादा मजबूत बनाएगी। जिससे हम अपनी मंजिल के और ज्यादा करीब पहुंच जाएंगे।


Daily Motivational Thoughts and Life Quotes.

"विकलांग सपना" Motivational Story

                                                                             Title: " विकलांग सपना " बहुत समय पहले की बात...